जावरा। पयरूषण पर्व के समापन के बाद गुरूवार को समाज के छोटे से लेकर बड़ो तक ने क्षमा मांगकर पर्व मनाया। इस दिन समाजजनों ने अपने द्वारा वर्ष भर में किसी के साथ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष हुए व्यवहार को लेकर समाज के साथ ही अन्य समाज के लोगो से क्षमायाचना (मिच्छामी दुक्कड़म) मांगी। वैसे तो बुधवार को संवत्सरी प्रतिक्रमण कर 84 लाख जीवा योनि से क्षमा मांगी।
इसी तरह गुरुवार को भी एक-दूसरे के घर जाकर क्षमा मांगी। यह क्रम देर शाम तक चलता रहा। मंदिर में विराजित साध्वियों ने क्षमापना पर्व के बारे में विस्तृत रूप से बताया।
ें 3 पर्वो का है महत्व
जैन धर्म त्याग प्रधान धर्म है। जैन समाज का सबसे बड़ा पर्व पर्यूषण पर्व को माना गया है। इन 9 दिनों में त्याग, तप की प्रभावना होती है। जैन धर्म में पयरूषण पर्व, अक्षय तृतीया, भगवान महावीर निर्वाण उत्सव 3 धर्मो का विशेष महत्व है। पयरूषण पर्व त्याग, तपस्या करने की प्रेरणा लेकर आता है। इस दौरान संतो के प्रवचन के माध्यम से स्वाध्याय, संयम, अपरिग्रह का अनुसरण करते है।
अक्षय तृतीया पर भगवान आदिनाथ के वर्षीतप पारणो के रूप में मनाया जाता है तथा भगवान महावीर निर्वाण उत्सव दिवस मोक्ष रूपी दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि संवत्सरी पर्व मैत्री, क्षमा, दानशीलता का दिवस है। क्षमापना दिवस पर मानव द्वारा किसी भी प्राणीमात्र का वर्षभर में दिल दुखाया हो तो इसके लिए यह पर्व क्षमा मांगने के लिए मनाते है।
निकला वरघोड़ा
जैन मंदिर से प्रात: 9 बजे तपस्वियांे का वरघोड़ा साध्वश्री रत्नरेखाश्रीजी आदि ठाणा 3 की निश्रा में निकला जो नगर के पिपली बाजार, जवाहर पथ, चुड़ीबाजार, बजाजा खाना, घंटाघर चौराहा, खारीवाल मोहल्ला, सोमवारिया, रावण द्वार, खाचरौद नाका होते हुए जैन दादावाड़ी पहुंचा। वरघोड़े में सबसे आगे अश्व पर धर्मध्वजा लेकर बालक बैठे थे। उसके बाद बग्गियों में 8 से 11 उपवास करने वाले, मिनीडोर में 3 से लेकर 7 उपवास करने वाले तपस्वी बैठे थे। बीच में श्रावक सफेद वस्त्र में चल रहे थे। श्रावकांे के पीछे साध्वीश्री की निश्रा में महिलाएं चल रही थी। बीच-बीच में ढोल की थाप पर युवक-युवतियां थिरक रही थी। कुछ तपस्वी हाथी पर विराजीत थे। वरघोड़े का संचालन राकेश पोखरना एवं माणक चपड़ोद ने किया।
किया बहुमान
इस दौरान 115 तपस्वियों का बहुमान भी श्रीसंघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने किया। सबसे बड़ी बात तो यह रही कि इनमें से 30 तपस्वी 15 साल से कम उम्र के थे जिन्होने 8 उपवास की तपस्या की। कुल 115 में से 55 अठ्ठाई हुई। इस दौरान म.प्र. शासन के तीर्थ व मैला प्राधिकरण अध्यक्ष मेघराज जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। तपस्वियों के पारणो का लाभ कमलाबाई फतेहलाल, पदमकुमार, कमलकुमार, चंद्रप्रकाश, अतुलकुमार नाहटा परिवार के लोगों ने लिया।
भाजपा ने किया स्वागत
घंटाघर चौराहे पर भाजपा ने वरघोड़े का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। स्वागत करने वालों में नंदकिशोर महावर, महेश सोनी, घनश्याम सोलंकी, प्रमोद रावल, गोपाल मोदी, संदीप झाला, चंद्रप्रकाश सोलंकी, अजयसिंह भाटी के साथ बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।
ये थे उपस्थित
क्षमायाचना के अवसर पर श्रीसंघ अध्यक्ष ज्ञानचंद चौपड़ा, मदनसिंह चौरड़िया, सुभाष लुक्कड़, महेन्द्र गोखरू, धरमचंद चपड़ोद, अनिल चौपड़ा, कांतिलाल दलाल, अशोक ओरा, पारस ओस्तवाल, विरेन्द्र सेठिया, लोकेन्द्र मेहता, अजय सकलेचा, प्रकाश संघवी, श्रीपाल दुग्गड़, महेन्द्र समन्द्रिया के साथ बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।