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छिंदवाड़ा

विश्व की रचना कर्म प्रधानता से: स्वामी

By Raj Express | Publish Date: 3/20/2017 6:10:36 PM
विश्व की रचना कर्म प्रधानता से: स्वामी

 होशंगाबाद। विश्व की रचना कर्म की प्रधानता से होती है। यद्यपि यह सिद्धांत सर्वमान्य है, तथापि कर्मफल से व्यक्ति होकर भगवान की शरण में जाता है। यह बात स्थानीय सेठानी घाट स्थित सत्संग चौक पर आयोजित पं. रामलाल शर्मा स्मृति समारोह ज्ञान सत्र के तीसरे दिन जालौन से पधारे संत स्वामी राजेश्वरानंद जी सरस्वती ने श्रीरामचरित मानस पाठ की पंक्तियों की व्याख्या करते हुए उपस्थित धर्मप्रेमियों को संबोधित करते हुए कही।  उन्होंने कहा कि व्यक्ति जब कर्म के आधार पर भगवान की शरण में जाता है तब भगवान उसके साथ विषम व्यवहार करते हैं अर्थात ऐसे व्यक्ति जो कर्मफल की विभीषिका से त्रस्त हो जाते हैं वे आश्रय करे तो भगवान की कृपा से उनकी कर्मगति अनुकूल हो जाती है। भगवान श्रीराम लक्ष्मण जी के साथ किष्कन्धा पधारे। सुग्रीव से जब हनुमान जी की मित्रता कराते हैं तब सुग्रीव भगवान को सांत्वना देते हैं। इस प्रसंग में जब लक्ष्मण जी व्यथित होते हैं तो भगवान श्रीराम ने कहा कि इन्हे देखकर सीता जी आभूषण गिराती हैं। हनुमान जी जिसकी पैरवी करते हैं मैं उसके गुण-दोष नहीं देखता जैसे शरण में होने पर विपरीत तैरने पर भी मछली पानी में नहीं डूबती। सुग्रीव भगवान पर पूर्ण विश्वास नही करता है, बल्कि उनके बल की ही परीक्षा लेता है। दूदुंभी अस्थि ताल बिखराए सुग्रीव कहता है कि बाली महाबली है, तब भगवान बाली को सुग्रीव का भरोसा दिलाने के लिए एक बाण में ही अस्थि ताल ढहा देते हैं। संत राजेश्वरानंद जी ने कहा कि व्यक्ति को अपने कर्म के साथ-साथ अपने फल को पाने के लिए विश्वास भी जरूरी है। कथा के पूर्व भजनांजलि कलाकार ने भजनों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर कलाकार प्राण कृष्ण सांई ने सुमधुर स्वर में प्रस्तुति दी। साथ में गायिका सिद्धा सांई ने भी संगत दी। वाद्य यंत्रों पर आनंद नामदेव ने तबले की ताल पर संगत दी। कथा के प्रारंभ में पूर्व विधायक गिरिजाशंकर शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष डा. सीतासरन शर्मा, सिवनीमालवा विधायक सरताज सिंह, आशीष दुबे, तरुण तिवारी, सत्यम दीवान, बीके चौहान, सीरूमल नवलानी, नरेन्द्र सिंह सोलंकी, प्रशांत मुन्नु दुबे, बालकृष्ण शर्मा, विनोद दुबे, आरएन कानवा, अशोक कुमार, झगनलाल रघुवंशी, अतुल भंडारी आदि ने संत श्री का माल्र्यापण कर स्वागत किया।

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