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छिंदवाड़ा

सूर्यास्त के समय अंत्योदय मेला

By Raj Express | Publish Date: 3/20/2017 6:15:10 PM
सूर्यास्त के समय अंत्योदय मेला

  पांढुर्ना। क्षेत्रीय विधायक जतन उइके नें मंच सें संबोधित करनें का अवसर ना देने के कारण मंत्री महोदय पर भेदभाव और दलगत राजनीती करनें का आरोप मचं सें ही लगाया। जिसमें उन्होने कहा कि एक आदिवासी विधायक होने के कारण यह व्यवहार मेरे साथ किया गया है। यह मेरा ही नही संपूर्ण आदिवासी समाज का अपमान है। अपनें तुगलकी मिजाज कें लिए मशहुर जिलें कें प्रभारी व कृषी मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन तय कार्यक्रम सें कई घंटों बाद पांढुर्ना मंडी परिसर में आयोजित अंत्योंदय मेले में पहुचें। जिसकारण हितग्राहीयों को दिन भर परेशान होना पड रहा था। शासन-प्रशासन द्वारा गांव-गांव सें लायी गई आधी भीड़ तों दोपहर में ही अपने गा्रमों में चली गई थी, वहीं बची हुई आधी भीड कों पुलिस अधिकारी व जनप्रतिनिधियों नें मिलकर मंत्री महोदय के आने तक रोक कें रखा। पांढुर्ना कें कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित अंत्योदय और कृषक सम्मेलन में बडी संख्या में भीड जुटानें कें स्थानीय अधिकारियों कें प्रयासों पर मंत्री महोदय नें पानी फेर दिया। जहा जनपद पंचायत, महिला बाल विकास विभाग, कृषि विभाग व अन्य कें हितग्राहीयों कों योजनाओं का लाभ लेनें कें लिए बडी संख्या में जुटाया गया था। अंत्योदय मेले का समय भलें ही निमंत्रण पत्र में दोपहर 3 बजें का दिया था, लेकिन मंत्री महोदय शाम 6 बजें कें पहलें नही पहुच पाये। जिसकारण भरी धूप और उमस में विभिन्न ग्रामों सें आये हुयें हितग्राही और लायी गई आम जनता पानी-पानी होती रही। एक दिन पहलें मोहखेंड में अंत्योंदय मेले का आयोजन हुआ था, जिसकें बाद कल जुन्नारदेव और पांढुर्ना में खंड स्तरीय अंत्योदय मेले का आयोजन रखा गया था। यदि मोहखेड व पांढुर्ना कें अंत्योदय मेंलें एक ही दिन रखे जातें तों निश्चित रूप सें पांढुर्ना कें मेंले में देरी नही होती। क्योकिं जुन्नारदेव व पांढुर्ना कें बिच कि दूरी 130-140 किमी कें आसपास है, जिसकारण मंत्री महोदय अंत्योदय मेंलें में सुर्यास्त को पहुचे। मेला परिसर में परेशान जनता कें लिए जब भोजन कें स्टॉल खोले गये तों वहा एकसाथ भीड टूट पडी और ऐसा नजारा देखनें कों मिला जैसें कृष्ण जन्माष्टमी में मटकी फोड प्रतियोगिता होंती है। 

रोते बिलखते रहे नवजात
 कार्यक्रम कि शोभा बढानें कें लिए स्थानीय प्रशासन नें जनप्रतिनिधियों कि मंशानुसार अधिक सें अधिक जनता व हितग्राहीयों कों अंत्योदय मेंलें में लानें का लक्ष्य विभागवार दिया था, जिसमें नवजात बच्चों का भी समावेंश था। जों लाडली लक्ष्मी योजना कें प्रमाण पत्र सामान्य रूप सें विभाग कें माध्यम सें भी बटतें है, वह प्रमाण पत्र भी सिर्फ दिखावें कें लिए मंत्री महोदय कें हाथों बटवानें का निर्णय स्थानीय प्रशासन नें लिया। जिसकें चलतें सिवनी सेक्टर कि विभिन्न आंगनवाडीयों सें 10 सें अधिक नवजात व नन्ही मुन्नी शिवराज मामा कि भांजीयों कों सुबह 9 बजें सें ही पांढुर्ना मुख्यालय में बुला लिया गया था, जों मंत्री कि राह में रोती बिलखती रही। भलें ही विभाग कें अधिकारीयों, सेक्टर सुपर वाइजरों व आंगनवाडी कार्यकर्ताओं नें उनकें लिए काफी व्यवस्था कि, लेकिन बच्चें तों बच्चें है कितनी देर मंत्री कि राह देख पाते। 
जनता को रोकती रही पुलिस
 जब दोपहर कें बाद काफी समय हों गया तब जनता कि सब्र का बान टूट गया और मेला स्थल सें अपने ग्रामों कें लिए पलायन करनें लगे। इसकी भनक लगतें ही स्थानीय अधिकारीयों नें नेताओं व जनप्रतिनिधियों कें इशारों पर मंत्री महोदय कें सामनें अपनी साख बचानें कें लिए मेला स्थल कों अस्थायी कारावास बना दिया। जहां पुलिस कर्मचारीयों कों गेट पर तैनात करकें परेशान जनता कों बाहर जानें सें रोका गया। यह घटनाक्रम मंत्रीजी कें कार्यक्रम संपंन्न होतें तक चलता रहा। जहा अधिकारीयों कों ना तों परेशान मातायें दिख रही थी, और ना ही बुजूर्ग। ऐसा प्रतित हो रहा था जैसें बंधुआ मजदूरों को ग्राम पंचायतों व विभागों कें माध्यम सें मंडी परिसर में लाकर कैद कर दिया गया हो, ताकिं मंत्री महोदय कें देर शाम तक आनें कें बावजुद भी भीड दिखायी दे। 
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