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ग्वालियर

उस्ताद ने मंच पर बुलाकर किया कुलपति का अपमान...

By Raj Express | Publish Date: 3/20/2017 2:47:40 PM
उस्ताद ने मंच पर बुलाकर किया कुलपति का अपमान...

ग्वालियर। हाफिज अली खान मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा सरोद घर में आयोजित संगीत संध्या में रविवार को उस्ताद अमजद अली खान ने राजा मानसिंह तोमर संगीत विवि की कुलपति प्रो. लवली शर्मा को सम्मानित करने के लिए मंच पर बुलाया और बिना शॉल ओढाए ही अपमानित करके वापस लौटा दिया। पद्म विभूषण उस्ताद अमजद अली खां ने संगीत विवि की कुलपति प्रो.लवली शर्मा को सम्मानित करने मंच पर बुलाया, लेकिन यह कहकर उन्हें अपमानित किया कि उनके पास कलाकारों के लिए गिनी हुई शॉल हैं, इसलिए वे उन्हें शॉल नहीं ओढ़ा सकते हैं। कुलपति अपमान का घूंट पीकर शांत रह गई और वापस अपने स्थान पर आकर बैठ गईं। इस बीच उस्ताद अमजद अली ने जब उनसे पूछा कि उन्हें ग्वालियर कैसा लगा, तो कुलपति ने बड़प्पन दिखाते हुए ग्वालियर की संस्कृति और संगीत की दिल खोल कर प्रशंसा की, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपमान की पीड़ा को कतई उजागर नहीं होने दिया।

मुफ्त में क्यों सिखाऊं संगीत: अमजद अली
पद्मविभूषण उस्ताद अमजद अली खान ने पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि जो लोग संगीत सीखना ही नहीं चाहते, ऐसे लोगों को मुफ्त में संगीत की शिक्षा देकर क्यों मैं अपना वक्त बर्बाद करूं। वे रविवार को उस्ताद हाफिज अली खान मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा सरोद घर में आयोजित संगीत संध्या की मेजबानी कर रहे थे। उस्ताद अमजद अली से जब यह सवाल किया गया कि सरोद घर उनके पूर्वजों की स्मृतियों को संजोयो हुए है, लेकिन सरोद घर में नए कलाकार तैयार करने के लिए आप क्या कर रहे हैं। इसके जवाब में उस्ताद ने कहा कि सरोद घर में नवोदित कलाकारों को तैयार करने के लिए दो साल तक प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई, लेकिन सिर्फ तीन युवा सीखने के लिए आए और चले गए। उन्होंने कहा कि जब कोई यहां सीखना ही नहीं चाहता है तो फिर में मुफ्त में उन्हें क्यों सिखाऊं। अमजद अली ने कहा कि शास्त्रीय संगीत वही सीख सकता है, जिसे कल की चिंता न हो। शास्त्रीय संगीत के साधक के लिए जरूरी है कि वह अपने गुरु पर भगवान जैसा भरोसा करे, लेकिन मुझे दुख है कि युवा अब संगीत के प्रति पहले की तरह समर्पित नहीं है। 
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