| मैं अपनी सोच के हिसाब से चलती हूं। आप कुछ भी पहनें, उससे आपको लगाव होना चाहिए तभी आपमें सही एटीट्यूड नजर आएगा और लोग आफ स्टाईल को पहचानेंगे।
उनकी मुस्कान में चढते सूरज की चमक है, रंग तांबई स्निग्धता लिए और हर देखने वाले को सुकून देता है। जमीं पर पडते कदम उस आत्मविश्वास की मौजूदगी दर्शाते हैं, जो उनकी आम सी दिखने वाली छवि में असाधारण खूबियों की बदौलत आया है। वो हैं फ्रीडा पिंटो। स्लम डॉग मिलेनियर की लतिका। दमदार अभिनय और खालिस भारतीय सौंदर्य ने उन्हें रातोंरात उस मुकाम पर पहुंचा दिया, जिसके लिए फिल्म इंडस्ट्री में बडे निर्देशकों की शुभंकर बनीं अभिनेत्रियां सालों से सपने बुन रही हैं। फ्रीडा का सफर अभी शुरू ही हुआ है और जो कुछ भी इस शुरुआत में हासिल हुआ है, उससे उन्हें आसमान छूने का हौसला मिला है।
फ्रीडा का जन्म 18 अक्टूबर 1984 को मुंबई के स्लिविया पिंटो और फ्रेडरिक पिटों के यहां हुआ। मुंबई के इस मध्यम वर्गीय परिवार में पली-बढी फ्रीडा प्रारंभिक अध्ययन के बाद मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से इंग्लिश लिट्रेचर में ग्रैजुएट हुईं। इसी कॉलेज में फ्रीडा की मुलाकात रोहन से हुई, बाद में 2॰॰8 में फ्रीडा ने रोहन से सगाई कर ली।
स्लमडॉग से जुडने से पहले फ्रीडा ने एक इंटरनेशनल ट्रैवलिंग शो की एंकरिंग की। रिगलीस, स्कोडा, वोडाफोन इंडिया, एअरटेल और डीबीयर्स जैसी नामी-गिरामी कंपनियों के विज्ञापनों में भी नजर आईं। चार साल तक फैशन शो और मैगजीन्स के कवर पर आने के दौर में ही फ्रीडा ने अपनी अभिनय कला को संवारने के लिए अंधेरी के द बेरी जॉन एक्टिंग स्कूल में अभिनय की शिक्षा ली। फिर शुरू हुआ ऑडिशंस का सिलसिला और छह महीने बाद डैनी बोयल ने फ्रीडा को फिल्म के लिए चुन लिया। निर्देशक डैनी बोयल के मुताबिक पहली नजर में ही फ्रीडा के भीतर लतिका दिखाई दी। डैनी बोयल की फिल्म बनी और इसने सफलता की वो दास्तां लिखी, जो किसी भी भारतीय के लिए गर्व की बात है। साधारण कहानी वाली इस फिल्म के असाधारण किरदारों और कर्णप्रिय संगीत ने आस्कर में भी अपनी धूम मचा दी। |